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प्रेरणा गीत

मई 11, 2006

मेरे एक मित्र ने मुझे एक इतालवी डाक्टर लाउरा बेरतेले की एक किताब पढ़ने को दी. लाउरा उत्तरी इटली में मिलान के पास काम करती हैं और जहाँ उनका फिसियोथेरेपी का केंद्र है. इस किताब में लाउरा बात करतीं हैं संगीत के प्रयोग की, शरीर की कठिनाईयों का उपचार करने के लिए. उनके अनुसार बहुत से लोगों को जो वाचन सम्बंधी कठिनाईयाँ तथा विकलाँगता होती हैं उनका उपचार सँगीत से हो सकता है. उपचार सँगीत में उन्हें ऊँचे स्वर अधिक उपयोगी लगते हैं और वह मोज़ार्त का सिम्फोनिक सँगीत और गिरजाघर में गाने जाने वाले ग्रगोरियन सँगीत का अपने केंद्र में बहुत प्रयोग करती हैं. इसी किताब में वह कुछ भारतीय सँगीतकारों की भी बात करतीं हैं.

लाउरा का कहना है कि हमारे कानों के भीतर स्वर और शरीर तालमेल का अंग (कोकलिया) साथ साथ बने हैं. शरीर के बहुत से हिस्सों में ठीक से काम न कर पाने की वजह इन्हीं दोनो अंगों के तालमेल के बिगड़ना है. इसलिए उनके इलाज में कानों की ध्वनि का विभिन्न स्वर स्तरों का मापकरण और उसके हिसाब से सँगीत उपचार का विषेश रुप है.

बाद में लाउरा से बात करने का मौका भी मिला, तो इस बातों पर अन्य कुछ जानकारी भी उसने दी.
****

फ़िर सोच रहा था सँगीत के बारे में और कैसे वह हमारे सारे जीवन में मिल जाता है. उत्तरी भारत में पैदा हो कर हिंदी फिल्मी सँगीत से आप का अनजान रहना हो ही नहीं सकता. आप अपने घर में रेडियो या टेलीविजन न भी रखें, आप के पड़ोसी या कोई भी उत्सव बिना इस सँगीत के पूरे नहीं होते. मुझे लगता है कि लता मँगेश्कर जी जैसे गायकों के गानों से बचपन से ही अपना सँगीत उपचार प्रारम्भ हो जाता है जिसे मुझ जैसे प्रवासी हर कठिनाई के क्षण में खोजते हैं!

लता जी के बहुत से गाने मुझे बहुत प्रिय हैं, विषेशकर एक गीत जिससे मुझे कठिनाई के क्षण में लड़ने की प्रेरणा मिलती है. गीत कौन सी फिल्म से है, यह मुझे ठीक से याद नहीं (इसमे शायद ईस्वामी की सहायता मिलगी, यह गीत जया भादुड़ी पर फिल्माया गया था और उनके साथ थे अनिल धवन) और गीत हैः

रातों के साये घने, जब बोझ दिल पर बने
न तो जले बाती, न हो कोई साथी
फिर भी न डर, अगर बुझे दिये
सहर तो है तेरे लिए
जब भी कभी मुझे कोई जो गम घेरें
लगता हैं होंगे नहीं, सपने ये पूरे मेरे
कहता है दिल मुझको, सहना है गम तुझको
फिर भी न डर, अगर बुझे दिए
सहर तो है तेरे लिए

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आज की तस्वीरों में हैं घोड़े


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5 टिप्पणियाँ leave one →
  1. Pratyaksha permalink
    मई 11, 2006 9:35 पूर्वाह्न

    ये गाना मुझे भी पसंद है

  2. Sagar Chand Nahar permalink
    मई 11, 2006 12:21 अपराह्न

    इस गाने के लिये मैं आपकी मदद कर देता हुँ, यह गाना अन्नदाता फ़िल्म का है इस गाने के बोल( Lyric) हिन्दी में यहाँ मौजुद हैं
    http://216.15.114.45:8080/cgi/tmp/it11080-CA992525-1/done5224.html
    और गाना सुनने के लिये यहाँ क्लिक करे
    http://www.musicindiaonline.com

  3. ई-छाया permalink
    मई 11, 2006 6:35 अपराह्न

    सुनील जी, आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ कि संगीत न हो तो दुनिया जाने कैसी बेरस बेरंग होगी, घोडों की तस्‍वीरें शानदार हैं, लगता है बस सवार हो जाऊँ

  4. ई-स्वामी permalink
    मई 11, 2006 10:12 अपराह्न

    सुनीलजी,

    आपको एक लिंक और साईट के बारे में बताता हूं -(शायद आपको पता ही हो)

    http://hamaracd.com/

    मानो यहां HMV वालों का सारा माल नए लेबल में है. यहां से आपको आपकी पसंद के पुराने गानों को ढूंढने, सेंपल सुनने, उनके रिवाईवल वाले डिजिटली मास्टर्ड वर्जन वाले यदी उपलब्ध हैं तो वे और ओरिजिनल वाले गाने भी कस्टम सीडी में रिकार्ड करवाने की सुविधा मिल जाएगी. उनके बारे मे जानकारी भी. गाने चुनो लिस्ट बनाओ और सीडी पाओ! मुफ़्त वाली low quality mp3 से cd को और गुणवत्ता को ज्यादा महत्व देने वाले व्यस्त व्यावसाईयों के लिए अच्छी सुविधा है.

    revival वाले वर्जन्स को भी सुन कर देखिएगा. इन दिनों मुझे रिवाईवल सिरीज़ बहुत पसंद है इसके चलते कई पुराने गानों की क्लिकिंग/पॉपिंग/हिस्सींग वाली रिकार्डिंग्स सुनने से बचा जाता हूं और गायक की आवाज़ भी ओरिजिनल कोई रिमिक्स नहीं. वैसे कई मित्र ओरिजिनल रिकार्डिंग के दीवाने हैं वो भी खुश.

    उधर सर्च मे रिवाईवल डाल के देखियेगा और ओरिजिनल और रिवाईवल की तुलना भी कीजिएगा किन्हीं गानों के लिए.

    यदी उचित लगे तो अपना ई-मेल मुझे eswami @ gmail . com (बिना स्पेस के आफ़कोर्स) पर एक मेल कर के भेज दें मेरे पास आपके काम की कुछ और "सामग्री" है. 🙂

  5. shivaji kapadi permalink
    मई 14, 2010 10:55 पूर्वाह्न

    aapki kavita acchi lagi aur janvaro ka picture accha tha aisa laga us par sawar ho jau.

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